॥ श्री गणेशाय नमः ॥

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संदर्भ

शब्दावली

हमारे ब्लॉग पर इस्तेमाल हुए रत्न और रुद्राक्ष से जुड़े ज़रूरी शब्दों के सरल, सटीक अर्थ — एक ही जगह पर।

मोह्स कठोरता स्केल
किसी रत्न या खनिज की खरोंच-प्रतिरोधक क्षमता मापने का 1 से 10 तक का पैमाना — तालक (talc) 1 पर और हीरा 10 पर है। ऊंचा स्कोर यह नहीं बताता कि पत्थर टूटने से भी उतना ही सुरक्षित है, सिर्फ यह कि वह खरोंच से बचता है।
कैरेट
रत्न के वज़न की अंतरराष्ट्रीय इकाई — 1 कैरेट बराबर 200 मिलीग्राम। ज्योतिषीय रत्न भारत में अक्सर रत्ती में भी मापे जाते हैं।
रत्ती
भारतीय ज्योतिषीय रत्न व्यापार में वज़न की पारंपरिक इकाई — लगभग 1 रत्ती = 0.91 कैरेट (ठीक अनुपात दुकानदार अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए खरीदते समय दोनों इकाइयां पूछ लें)।
क्लैरिटी (स्वच्छता)
किसी रत्न में मौजूद इनक्लूज़न (आंतरिक दाग/मिश्रण) की मात्रा और दिखावट — रंग और कैरेट के साथ यह भी कीमत तय करने वाला एक बड़ा कारक है।
ट्रीटमेंट (उपचार)
रंग या क्लैरिटी सुधारने के लिए रत्न पर की गई कोई भी प्रक्रिया — जैसे हीट ट्रीटमेंट, ऑयलिंग या लाख भरना। हर प्रतिष्ठित सर्टिफिकेट पर ट्रीटमेंट की जानकारी साफ़ लिखी होनी चाहिए, छुपाई नहीं जानी चाहिए।
सर्टिफिकेशन रिपोर्ट
किसी मान्यता प्राप्त जेमोलॉजिकल लैब द्वारा जारी दस्तावेज़ जो रत्न की पहचान, वज़न, रंग, क्लैरिटी और ट्रीटमेंट को प्रमाणित करता है — खरीदने से पहले हमेशा असली सर्टिफिकेट ज़रूर मांगें।
IGI
इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट — हीरे और रंगीन रत्नों दोनों के प्रमाणीकरण के लिए जानी जाने वाली एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय लैब, जिसकी भारत में भी शाखाएं हैं।
GIA
जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका — हीरों के लिए सबसे व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त प्रमाणन संस्था, विशेष रूप से रंग और क्लैरिटी ग्रेडिंग में अपनी सख्ती के लिए जानी जाती है।
GRS
जेमरिसर्च स्विट्ज़रलैंड — रूबी, सैफायर और पन्ना जैसे रंगीन रत्नों की उत्पत्ति (origin) जांचने में विशेष रूप से भरोसेमंद मानी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय लैब।
GTL
जेम टेस्टिंग लैबोरेटरी — भारत में 1972 से मौजूद एक स्थापित सरकारी-मान्यता प्राप्त जेमोलॉजिकल लैब, जो घरेलू बाज़ार में व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है।
इनक्लूज़न
रत्न के अंदर मौजूद प्राकृतिक आंतरिक निशान या मिश्रण — जैसे पन्ने में 'जार्डिन' या नीलम में 'सिल्क' — असल में यह रत्न के प्राकृतिक होने का संकेत है, हमेशा दोष नहीं।
उत्पत्ति (ओरिजिन)
रत्न की खनन जगह — जैसे रूबी के लिए बर्मा या मोज़ाम्बिक, नीलम के लिए श्रीलंका या कश्मीर। एक ही गुणवत्ता के रत्न की कीमत उत्पत्ति के आधार पर काफी अलग हो सकती है।
मुखी
रुद्राक्ष की सतह पर प्राकृतिक रूप से बनी खड़ी धारियों (मुख) की संख्या — यही तय करती है कि वह 1 मुखी है या 21 मुखी, और परंपरागत रूप से किस देवता व ग्रह से जुड़ा माना जाता है।
राशि
वैदिक ज्योतिष में जन्म-कुंडली पर आधारित 12 राशियों में से एक — पारंपरिक मान्यता के अनुसार किसी व्यक्ति की राशि उसके लिए उपयुक्त रत्न तय करने में एक कारक मानी जाती है।
ग्रह (प्लैनेट)
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह (नवग्रह) — हर पारंपरिक रत्न या रुद्राक्ष को इनमें से किसी एक ग्रह से संबंधित माना जाता है, जो पारंपरिक मान्यता है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।
मंत्र
किसी रत्न या रुद्राक्ष को धारण करते समय परंपरागत रूप से जपा जाने वाला मंत्र — इसे धार्मिक/सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखा जाता है, इसका पालन व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर है।
साढ़ेसाती
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह की साढ़े सात साल की एक कुंडली-अवधि — पारंपरिक मान्यता में इसे चुनौतीपूर्ण दौर माना जाता है, जिसके लिए ज्योतिषीय उपाय सुझाए जाते हैं।
पंचधातु
पांच धातुओं (आमतौर पर सोना, चांदी, तांबा, पीतल और लोहा/जस्ता) से बनी एक पारंपरिक मिश्र धातु, जिसका उपयोग रत्न या रुद्राक्ष की अंगूठी/माला बनाने में किया जाता है।
सिंथेटिक / लैब-निर्मित
प्रयोगशाला में मानव-निर्मित प्रक्रिया से बनाया गया रत्न, जिसकी रासायनिक संरचना प्राकृतिक रत्न जैसी हो सकती है — पर पारंपरिक ज्योतिष में इसे प्राकृतिक रत्न का विकल्प नहीं माना जाता।